दृष्टि ने तुम्हारी बाबा

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

दृष्टि ने तुम्हारी बाबा हम सब की सृष्टि बदल दी,

इक शक्ति अलौकिक भर दी आनंद में सृष्टि कर दी,

ये देह बानू बुलाती है दुनिया से दूर ले जाती है ,

जो उड़न खटोले में लेकर तीन लोक का सैर करवाती है,

श्री मत की डोर चित चोर बन अपनी और लिए चल दी,

दृष्टि ने तुम्हारी बाबा हम सब की सृष्टि बदल दी,

नहद से नाग में बोले अंतर् के भेद ये खोले,

हम इन्द्रए ये सुख में बोले नैनो के बैठ हिंडोले,

छल का है सागर मन की गगर में रूहानी मस्ती भर दी,

दृष्टि ने तुम्हारी बाबा हम सब की सृष्टि बदल दी,

इनमे संसार हमारा है नव युग का नया नजारा है,

कब वापिस घर को चलने का मिल रहा मधुर इशारा है

पावन निर्मल मुस्कानो ने नैनो में सेहजल भर दी ,

दृष्टि ने तुम्हारी बाबा हम सब की सृष्टि बदल दी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।