ये गले से लगा लेगी तस्वीर से निकल के

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

कहकर तो देखो माँ से दुःख दर्द तेरे दिल के,

ये गले से लगा लेगी तस्वीर से निकल के,

मेरी माँ का ये भोला मन दया करुणाका है संगम,

गंगा की तरह है पावन ये माँ का प्यारा अपना पण

तल जायेगी ये मुसीबत इक बार माँ से मिल के,

ये गले से लगा लेगी तस्वीर से निकल के,

दुनिया में कही न देखा है माँ का प्यार ऐसा

तड़प उठ ता है दिल इस का कही पर जो लाल है रोता,

फट जाता है कलेजा आँखों से आंसू छलके,

ये गले से लगा लेगी तस्वीर से निकल के,

कहता सोनू अगर मानो कही भटको नहीं दीवानो,

है जग जगनि एहि जानो तुम इसकी प्रीत पहचानो ,

चाहे तो पल में तेरी मैया तकदीर बदल दे,

ये गले से लगा लेगी तस्वीर से निकल के,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।