सहीआं नहीं जांदीयां तेरीआ जुदाईयां वे

कृष्ण दास भूटानी
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

साडी गली आ वे श्यामा, अँखिआ विछाईया वे,

सहीआं नहीं जांदीयां तेरीआ जुदाईयां वे

हर पल हर घडी तेरिआं उडीकां ने,

तुहिओ दस पाईआं कानू लम्बीयां तरीकां ने ।

तेरे झूठे लारेयां ते आंखियां भर आईआ ने,

सहीआं नहीं जांदीयां...

याद तेरी दिल विचो कड नहीं सकदी,

प्रेम कित्ता दिलो तैनू छड़ वी नहीं सकदी ।

कित्ता की कसूर केहड़िया कितीयां बुराईयां वे,

सहीआं नहीं जांदीयां...

अपने प्यारेया नू ऐना नहीं रुलाईदा,

ला के गले नाल कदे हँसा वी लेना चाहिदा ।

आवेगा कदी ते आसा ‘दास’’ ने लगाइए ने,

सहीआं नहीं जांदीयां...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।