तेरी ऊँगली पकड़ के चला

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॥ पावन पाठ ॥

तेरी ऊँगली पकड़ के चला

ममता के आंचल में पला

माँ ओ मेरी माँ मैं तेरा लाडला

माँ ओ मेरी माँ मैं तेरा लाडला माँ ओ मेरी माँ

बनके तेरा साया मैं तुझको थाम लूँ

उठके रब से पहले मैं तेरा नाम लूँ

बनके तेरा साया मैं तुझको थाम लूँ

उठके रब से पहले मैं तेरा नाम लूँ

रखूँ तुझे पलकों तले पूजा करूँ तेरी

तेरे सिवा तू ही बता क्या ज़िन्दगी मेरी

मैं तो तेरे सपनो के रंग में ढला

तेरी ऊंगली पकड़ के चला

ममता के आंचल में पला

माँ ओ मेरी माँ मैं तेरा लाडला

माँ ओ मेरी माँ मैं तेरा लाडला

बचके अपने घर से सुख जाएगा कहाँ

बदलेगा नसीबा एक रोज़ मेरी माँ

तेरी ख़ुशी मेरी ख़ुशी गम तेरा मेरा गम

तेरे लिए तेरी कसम लूँगा मैं सौ जनम

तू नहीं तो दुनिया में कुछ नहीं मेरा

तेरी ऊंगली पकड़ के चला

ममता के आंचल में पला

माँ ओ मेरी माँ मैं तेरा लाडला

माँ ओ मेरी माँ मैं तेरा लाडला

तेरी ऊँगली पकड़ के चला

ममता के आंचल में पला

माँ ओ मेरी माँ मैं तेरा लाडला

माँ ओ मेरी माँ मैं तेरा लाडला माँ ओ मेरी माँ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।