भक्त बनता हूँ मगर

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

भक्त बनता हूँ मगर अधमों का हूँ सरताज भी

देखकर पाखंड मेरा हंस पड़े ब्रजराज भी

कौन मुझसे बढकर पापी होगा इस संसार में

सुन के पापों कि कहानी डर गये यमराज भी

भक्त बनता हूं मगर अधमों का हूँ सरताज भी

देखकर पाखंड मेरा हंस पड़े ब्रजराज भी

क्यों पतित उनसे कहे सरकार तुम तारो हमें

हैं पतितपावन तो रखेंगे अपनी लाज भी

भक्त बनता हूं मगर अधमों का हूँ सरताज भी

देखकर पाखंड मेरा हंस पड़े ब्रजराज भी

बिन्दु दृग के दिल हिला दें क्यों न दीनानाथ का

दर्द दिल भी साथ है और दुखभरी आवाज भी

भक्त बनता हूं मगर अधमों का हूँ सरताज भी

देखकर पाखंड मेरा हंस पड़े ब्रजराज भी

भक्त बनता हूँ मगर अधमों का हूँ सरताज भी

देखकर पाखंड मेरा हंस पड़े ब्रजराज भी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।