कोरोनो तेरो नास जाएगो

पारंपरिक
महादेव भजन विविध भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

तू को ठौर मेलेगो ना

कोरोनो तेरो नास जाएगो

तेने ब्रज वासीन को छीन लियो

जलेबी और कचोरी को दोना

तू को ठौर मेलेगो ना

कोरोनो तेरो नास जाएगो

घर में बैठे तरस रहे है

लड्डू राबड़ी छीना को

पॅयन मसालो बीट गयो है

कही मिले ना तंबाकू

कोरोनो तेरो नास जाए

कोरोनो तेरो नास जाएगो

तू को ठोर मेलेगो ना

आँखिया कबसे तरस रही है

ठाकुर जी के दरशन को

यमुना मैया याद करे

अपने भोले भक्तो को

कोरोनो तेरो नास जाएगो

तू को थोर मेलेगो ना

तोको शरम नेक नही आवे

बालक बैठे पढ़ावे पे

तोहे कहा आराम मिले

सास बहू के लड़ने पे

कोरोनो तेरो नास जाए

कोरोनो तेरो नास जाएगो

तू को थोर मेलेगो ना

माराग सूने पनघट सूने

सूनी कुंजन गलियाँ रे

ब्रजवसीन को श्राप है तुको

जान जान के हत्यारे

कोरोनो तेरो नास जाए

कोरोनो तेरो नास जाएगो

तू को ठोर मेलेगो ना

बरज वासीन की बात टके है

भूखे बंदर और गैया

व्याकुल होके राह टके है

व्रक्षक की शीतल छैया

कोरोनो तेरो नास जाए

कोरोनो तेरो नास जाएगो

तू को ठोर मेलेगो ना

मारी पूतना कान्स बचो ना

कान्हा के प्रहार से

तू तो पल में मिट जागो

ब्रजवसीन की ललकार ते

कोरोनो तेरो नास जाए

कोरोनो तेरो नास जाएगो

तू को ठोर मेलेगो ना

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।