तेरा दर छड़ के जाना नहीं

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

दातेया दातेया दातेया दातेया

तेरे सोहने दर नु छड़ सतगुरु साडा होर ठिकाना नहीं,

ना करि चरनी तो साहनु दूर तेरा दर छड़ के जाना नहीं,

झूठे जग ने बहुत सत्या ताहियो तेरे दर ते आया,

तेरे दर विच किस दे घाटा मेरा ऐवे जन्म गवाया,

तेरे वाजो मेरा पापी दा कोई होर ठिकाना नहीं,

ना करि चरनी तो साहनु दूर तेरा दर छड़ के जाना नहीं,

झूठे जग ने बहुत सत्या ताहियो तेरे दर ते आया,

नाम दा रंग चढ़ा दे मैनु दुबदा पार लगा ले मैनु,

पंज और छोर जो नजर करे ने ओहना कोलो बचा ले मैनु,

तेरे दर मीठा अमृत छड़ के जहर मैं खाना नहीं,

ना करि चरनी तो साहनु दूर तेरा दर छड़ के जाना नहीं,

झूठे जग ने बहुत सत्या ताहियो तेरे दर ते आया,

सतगुरु तेरी बंदगी करनी तहियो तेरे टिकियाँ चरनी

तू ही परम पिता मेरे दाता तुहियो साडी रक्षा करनी ,

कहे दास निमोना दाता तनु दिलो भुलाना नहीं,

ना करि चरनी तो साहनु दूर तेरा दर छड़ के जाना नहीं,

झूठे जग ने बहुत सत्या ताहियो तेरे दर ते आया,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।