मौजां रखी दातिए

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मौजां रखी दातिए मेरी मौजां रखी माँ

लाई चरनी तू रख मैनु करि ना माँ वख

लड्ड फड़ेया माँ तेरा तू वी फड़ी रखी बांह,

मौजां रखी दातिए...

नौकर कहांवा माँ मै वी तेरे दर दा

बण जांवा कुत्ता माँ मै वी तेरे घर दा

ना तू दरों दुद्कारी तैनू अर्ज़ा माँ करदा

गल्ल सुन मेरी माँ तैनू सच मै कंहा

तेरे दरों डिग्गिया न किते मिलदी ना छाँह,

मौजां रखी दातिए...

जदो दा माँ रानी असां पल्ला तेरा फड्या

लौंका दी जुबान उत्ते नाम साहड़ा चड्या

मिटटी न तू चुक्क माये सोने विच मड़या

तुइयो दौलत दित्ती तुइयो शोहरत दित्ती

इक तेरा करके माँ जग जाणे मेरा नां

मौजां रखी दातिए...

होर मैनु दाती किसी चीज दी वी लोड ना

ओक्कात नालो वध दित्ता मांगिये की होर माँ

इन्ना दित्ता दातिए तू छड़ी कोई थोड़ न

‘जगदीश’ माँ गावे राम तान सुनावे

‘रंगा’ एहो गल्ल आखे मै वी तेरा लाल हाँ मौजां .....

जगदीश अनजान नीलोखेड़ी करनाल

09896249588

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।