मैं वृन्दावन नु जाना ए मेरा ठाकुर वाजा मार दा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मैनु ब्रिज दे सपने आउंदे ने इंज लगदा श्याम बुलाउंदे ने,

मैनु उठदे बहन्दे सोहन्दे जगदे नशा रवे दिल दार दा,

मैं वृन्दावन नु जाना ए मेरा ठाकुर वाजा मार दा,

बांके बिन मैनु कुझ न भावे दिने रात ओह्दी याद सतावे ,

याद ओह्दी विच कमली होइ जग पेय ताने मार दा,

मैं वृन्दावन नु जाना ए मेरा ठाकुर वाजा मार दा,

हाय लोको मेरी गल न टोको,

वृन्दावन जानो न रोको संता भगता नाल नजारा लूटन देयो दीदार दा,

मैं वृन्दावन नु जाना ए मेरा ठाकुर वाजा मार दा,

वृन्दावन जग तो न्यारा है प्रेमा भगति दा द्वारा है,

कहे मधुप एह ठाकुर द्वारा मैं सारे संसार दा,

मैं वृन्दावन नु जाना ए मेरा ठाकुर वाजा मार दा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।