साडे वल मुखड़ा मोड़ वे प्यारेया

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॥ पावन पाठ ॥

साडे वल मुखड़ा मोड़ वे प्यारेया ,

आपे पाइयाँ कुंडियां ते आपे खिच्दा है डोर

वे प्यारेया साडे वल मुखड़ा मोड़,

अर्श कुरष ते वांगा मिलियाँ,

मके पे गया शोर,

वे प्यारेया साडे वल मुखड़ा मोड़,

बुलेशाह असि मरणा ना ही

मर जावे कोई होर,

वे प्यारेया साडे वल मुखड़ा मोड़,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।