आरती टेकचंद जी महाराज की

पारंपरिक
अन्य आरती गुरुदेव भजन aarti
॥ पावन पाठ ॥

ॐ जय गुरुदेव हरे, ॐ जय गुरुदेव हरे,

दीनजनों के संकट, तुम गुरु दूर करें ,

पुण्य पयोनिधि पावन, आलरी की धरती,

हर्ष विभोर धरा ने, गोदी निज भर दी ,

लता पुष्प लहराये, सरस समय आया,

सुमन गंध अंजलि भर, श्रद्धानत लाया ,

एक अलौकिक क्षण था, बिखरी नव आभा ,

गुरु के चरण परत ही, दुख विषाद भागा ,

रुकमणी अंक किलोलित, उदय गोद खेले,

प्रमोदित मात-पिता हो, बालक चाल चले ,

दामोदर कुल हर्षित, गुरु प्रसाद पाया ,

पावन स्वर गुरुवर का नवजीवन लाया ,

कलि कुल कलुष सने है, मुक्ति कौन करे,

अगम भाव भावन को, अभिनव आन धरे ,

कलयुग कलुष मिटाने, कड़छा मन भाया ,

साधि साधना तुमने, हटि गहन माया ,

जान अकिंचन हमको, ज्ञान चक्षु दे दो ,

भव सागर तर जावें, बीज मंत्र कह दो ,

शरण पड़े हम तेरी, अवलंबन प्रभु दो ,

उभय लोक सुखकारी, वरद हस्त धर दो ,

हीरा तो पत्थर हैं, चमक तुम्हीं देते ,

मोह जड़ित जड़ मन को, ज्योतित कर देते ,

विनय भाव जो जन, गुरु महिमा गावे ,

आनंदित हो जीवन, भव से तर जावे ,

ॐ जय गुरुदेव हरे, ॐ जय गुरुदेव हरे ,

दीनजनों के संकट, तुम गुरु दूर करें ,

Singer : Yogesh Prashant Nagda Dhar

8269337454

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।