एक तेरा संग हो बाबा

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॥ पावन पाठ ॥

एक तेरा संग हो बाबा मेरे तो जीवन है मेरा सदा बेफिक्र ,

तेरी यादो में डुभा है दिल मेरा तेरे प्यार से हुआ ऐसा असर,

एक तेरा संग हो बाबा

ये महफ़िल देख कर हूरो की बाबा तेरी,

हर पल दिल ये मेरा पास आ जाए,

ये अनुभव अनोखा बड़ा ही लासानी ,

सोच के मेरा मन पावन हो जाए,

कभी बुलु भी इक लम्हा बाबा तुम को

तुम पास आ जाते हो खुद ही अक्सर,

एक तेरा संग हो बाबा

जब भी देखु समाने तुम को मेरे बाबा दिल ये मेरा खुशियों से भर जाता है,

तेरी मीठी रूहानी मुस्कानो से बाबा तन मन मेरा जीवन ये मुस्कुराता है,

हर आहट में बाबा एहसास तेरा पल पल रखते हो मुझपे नजर,

एक तेरा संग हो बाबा

सूरज चाँद तारो से पार मैं उड़ जाऊ अपनी प्यारे प्यारे मीठे वतन

मिलन मना कर तुमसे बाबा मैं भर जाऊ इन्ही लग्न में हो जाऊ यु सदा मगन,

तेरे रंग बिरंगे किरणों के शत्र छाया में महसूस होता मन को है निरंतर,

एक तेरा संग हो बाबा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।