घन घन घनघोर घटाओ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

घन घन घनघोर घटाओ आओ आओ झूम के आओ,

आये संकट के पल देखके करुणा का जल,

प्यासी धरती की प्यास बुजा माता,

विनती करते है हम अब तू करदे रेहम जादू अपनी कला का दिखा माता,

तेरी दया के सागर में क्या है कमी,

तेरे भगतो पे क्यों आज विपता पड़ी,

सुखी नदियां है सूखे है जल कूप माँ,

आजा धार के घटाओ का रूप माँ,

आंसू झर झर बहे रो रो तुझसे कहे ऊचे भवनों से उड़ के तू आ माता,

घन घन घनघोर घटाओ आओ आओ झूम के आओ,

बिना पानी जुलस गए सब खेत माँ,

अब तो छोले उगल ने लगी रेट माँ,

पेड़ पोडो से रूठे है फल फूल माँ,

पशु पक्षी चेहकना गए भूल माँ,

कहे मुरझाये तन दुःख में डुभे ये मन,

फिर से खेतो में हरयाली ला माता

घन घन घनघोर घटाओ आओ आओ झूम के आओ,

तूने कष्टों से करना बचाया हमे,

फिर दयालु कहे गा कौन तुम,

माँ शकुम्बर का फिर नया रूप धर

हे महादिव्ये शक्ति चमत्कार कर ,

भक्त सारे तेरे हाथ जोड़े खड़े इनका सोया नसीबा जगा माता,

घन घन घनघोर घटाओ आओ आओ झूम के आओ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।