आ लौट के आजा मेरे मीत

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

आ लौट के आजा मेरे मीत तुझे मेरे गीत बुलाते है

मेरा सुना पड़ा रे संगीत तुझे मेरे गीत बुलाते है,

आ लौट के आजा मेरे मीत

दर से गगन मेरे बरसे नैनं देखो तरसे है मन अब तो आजा,

शीतल पवन ये लगाए अगन हो सजन अब तो मुखड़ा दिखा जा,

तूने भली ये निभाई प्रीत तुझे मेरे गीत बुलाते है,

आ लौट के आजा मेरे मीत

इक पल हसना इक पल है रोना कैसा है जीवन का खेला,

इक पल है मिलना इक पल बिछड़ना दुनिया है दो दिन का मेला,

ये घड़ी न जाए बीत तुझे मेरे गीत बुलाते है,

आ लौट के आजा मेरे मीत

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।