मेरा मन मंदिर मेरा मन मस्जिद

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॥ पावन पाठ ॥

मेरा मन मंदिर मेरा मन मस्जिद मैं घर से बहार क्यों जाऊ,

मेरा साई है मेरे कब्जे में मैंने देखा है उसे जग चाहु,

काशी भी याहा काबा भी याहा और शिरडी के बाबा भी यहाँ,

ये कुल की हिफयत करते है फिर क्यों न इनके गुण गाउ,

मेरा मन मंदिर मेरा मन मस्जिद

कभी पास मिला कभी दूर मिला.

साई में हमेशा नूर मिला,

किस्मत के अथेरे गेर मिले

पर अब मैं न कभी गबराऊ

मेरा मन मंदिर मेरा मन मस्जिद

फूल जंगल में भी खिलते है,

बिना मांगे मोती मिलते है,

ये राज मगर न समजो तो फिर कब तक मैं समजाउ

मेरा मन मंदिर मेरा मन मस्जिद

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।