पानी में नहाते हो कभी सत्संग मै नहाया करो

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॥ पावन पाठ ॥

पानी में नहाते हो सत्संग में नहाया करो

खाए खाए तुमको सब जीवन बीत गया

खाना तो खाते हो कभी गम भी खाया करो

औरों की बुराई तो तुम सुनते सुनाते हो

कुछ अपनी बुराई भी कह कह कर सुनाया करो

निज अवगुण कहने की हिम्मत तो जुटाया करो

पानी में नहाते हो सत्संग में नहाया करो

पानी में नहाती हो सत्संग में नहाया करो

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।