आ शाम के संग चले प्यारे बरसाने में

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

आ शाम के संग में चलें प्यारे बरसाने में

यूं कहें हम ब्रज की बातें अपनी आवाजों में

कान्हा मिलना और बिछड़ना इस जीवन की रीत रही

जितने रूप बदले मन में लेकिन प्रीत रही

राधा रानी बताएंगे, राधा रानी बताएंगे अपने अंदाज में

आज शाम के संग चले प्यारे बरसाने में

हमने सुना है बरसाने में आज भी वो रीत रही

होली की बात कहें तो आज भी वहां जीत रही

फूलों का श्रृंगार किए, फूलों का श्रृंगार किए

आज भी वो बरसाने में

आज शाम के संग चले प्यारे बरसाने में

मैं कैसे कहूं कन्हाई तेरी इन प्यारी बातों को

सबने यही सुना है राधेकृष्ण की बातों को

नित रोज यही गाऐ, नित रोज यही गाऐ

राधेकृष्ण के विचारों को

आज शाम के संग में चले प्यारे बरसाने में

गायक भजन सम्राट भागवताचार्य

पंडित राधेकृष्ण जी महाराज श्यामगढ़

लेखक ‌ , पंडित राधेकृष्ण जी महाराज

M.9009770820,9039392870

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।