गुरु नाम जो जपे

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॥ पावन पाठ ॥

गुरु नाम जो जपे दुःख दर्द मिटे सदा नाम जपना,

तेरा जीवन है अनमोल यु ही मिटटी में न रोल इसे सफल बना,

है ये पल दो पल का जीवन करले नाम का तू सिमरन अपनी रूह को जगा,

सदा संग है तेरे लाखो पाप ये हरे,

प्रभु नाम भजना

तेरी झूठी है ये काया और झूठी है माया तू न दिल को लगा,

कहा संतो का तू मान कर आतम कल्याण

सरे भरम भगा,

सच्चा नाम अपना है जगत सपना,

सदा याद रखना सदा याद रखना,

गुरु नाम जो जपे

चार दिन की जिंदगानी सारी झूठी है कहानी तू मेहमान है याह,

मिले गिनते के है है स्वास करले तू भजन अभियाश चले साथ वाह,

तेरा असली है ये काम है ये साँचा गुरु नाम,

सदा याद रखना सदा याद रखना,

गुरु नाम जो जपे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।