तेरा ही वजूद है एह मेरे मुर्शिद

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॥ पावन पाठ ॥

तेरा ही वजूद है एह मेरे मुर्शिद

बिना तेरे मेरा नहीं है गुजारा,

तेरा ही कर्म है ये तेरी ही इनायत

क्या से क्या बनाया है तेरी ही रेहमत ,

हम भूलो को राह लगाया

बिना तेरे मेरा नहीं है गुजारा,

भक्तो के खातिर ये रचन रचाई,

ज्योत इलाही मेरी मुर्शिद की आई.

भक्ति का पवन दर ये बनाया,

बिना तेरे मेरा नहीं है गुजारा,

सागर से गेहरा हिरदये ये तेरा,

सूरज से बढ़कर जलवा ये तेरा,

खुदा तारने खुद ही जहांन में है आया,

बिना तेरे मेरा नहीं है गुजारा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।