कहंदे ने नैना तेरे कोल रहना

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॥ पावन पाठ ॥

तेथो मंगना नहीं संगा गैरा तो मूल नहीं मंगना,

मंगा ये गेरा तो तेरा मंगता किहने कहना,

कहंदे ने नैना तेरे कोल रहना

तेरे बाजो दस होर कीह्नु कहना,

कहंदे ने नैना तेरे कोल रहना

जी करे कॉल बैठी रवा बैठे बैठे तक दी रवा,

मिलना तेरा तेरा मिलना अस्सा रब दा मेल कहना,

कहंदे ने नैना तेरे कोल रहना

तेथो मंगना नहीं संगा गैरा तो मूल नहीं मंगना,

मंगा ये गेरा तो तेरा मंगता किहने कहना,

कहंदे ने नैना तेरे कोल रहना

तेरे बाजो दस होर कीह्नु कहना,

कहंदे ने नैना तेरे कोल रहना

जी करे कॉल बैठी रवा बैठे बैठे तक दी रवा,

मिलना तेरा तेरा मिलना अस्सा रब दा मेल कहना,

कहंदे ने नैना तेरे कोल रहना

चरम देखा ते बंदा कर्म रेखा ते गंदा,

बंदेया गंदेया बंदगी तेरा गेहना,

कहंदे ने नैना तेरे कोल रहना

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।