न कहीं से दूर हैं मंजिलें

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॥ पावन पाठ ॥

न कहीं से दूर हैं मंजिलें,

न कोई करीब की बात है ।

जिसे तुम ने दर पे बुला लिया,

ये बड़े नसीब की बात है ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।