लिखण वालेया तू होके दयाल लिखदे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

हो लिखण वालेया लिखण वालेया,

लिखण वालेया तू होके दयाल लिखदे

मेरे हिरदये विच गुरा दा ख्याल लिखदे,

लिखण वालेया तू होके दयाल लिखदे

अखा विच लिखदे दर्श गुरा दा,

मेरी जुडी रवे गुरा नाल ताल लिख दे ,

उठत बैठत सोवत जागत ,

मेरी जुडी रवे गुरा नाल तार लिखदे,

लिखण वालेया तू होके दयाल लिखदे

इक न लिखी मेरे गुरा दा विछोड़ा,

पावे रूस जावे सारा संसार लिख दे,

लिखण वालेया तू होके दयाल लिखदे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।