राधे के चरणों में गिर कर आंसू मोती बन जाते

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

राधे के चरणों में गिर कर आंसू मोती बन जाते,

हो जाते बेकार ये अगर कही और बह जाते,

राधे के चरणों में गिर कर आंसू मोती बन जाते

गुट गुट कर अंदर अंदर जब दिल का दर्द उबलता है,

बाँध तोड़ कर पलको के आंसू का दरिया बेहता है,

बह जाते है आंसू तो लेकिन दिल को हल्का कर जाते,

राधे के चरणों में गिर कर आंसू मोती बन जाते

उसके आगे क्या रोना जो मोल न आंसू का जाने,

अंतर् मन की पीड़ा केवल अन्तर्यामी ही जाने,

बोल नहीं सकते जो कुछ हम वो आंसू कह जाते,

राधे के चरणों में गिर कर आंसू मोती बन जाते

ममता मई मेरी राधे जी आंसू देख पिघल जाती ,

लाल के बहते आंसू में उसकी करुणा की बह जाती है,

माँ की गोद से ज्यादा बचे और कहा सुख पाते,

राधे के चरणों में गिर कर आंसू मोती बन जाते

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।