तेरी रेहमतो

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॥ पावन पाठ ॥

जब तक थी तुम से दुरी कीमत न कुछ मेरी थी,

हुई तुम से जो महोबत मेरा नाम बन रहा है,

तेरी रेहमतो का दरिया शरेआम चल रहा है,

मुझे भीख मिल रही है मेरा काम चल रहा है,

मैंने जब भी जहां पुकारा तूने दे दिया सहारा,

तेरे नाम के सहारे मेरा काम चल रहा है ,

तेरी रेहमतो का दरिया शरेआम चल रहा है,

मुझे मद की नहीं जरुरत तेरे नाम का नशा है तेरे नाम का नशा है,

तेरे धाम की मदिरा हर जाम बन रहा है,

तेरी रेहमतो का दरिया शरेआम चल रहा है,

मुझे इश्क़ है तुम्ही से मैं दीवाना बन गया,

मैं दीवाना बन गया हु मैं दीवाना बन गया हु,

मेरे दिल की धड़कनो में तेरा नाम चल रहा है,

तेरी रेहमतो का दरिया शरेआम चल रहा है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।