हम सब पे तेरा एहसान है

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॥ पावन पाठ ॥

हम सब पे तेरा एहसान है

तेरी मीठी सी रूहानी मुस्कान है,

मेरी रूह का तू सकूँ है,

तेरे संग चलने का सकूँ है,

मेरी रूह का तू सकूँ है,

तू है तो हम है सतगुरु बिन तेरे हम कुछ भी नहीं,

कुछ भी के हम कुछ भी नहीं

ये है हम को यकीन के हम कुछ भी नहीं,

तू ही इबादत मेरी तू ही मेरा खुदा,

आँखों की मसरत तू ही रूह की सदा,

तेरे बिन जिंदगी बेजान तू सब के लिए वरदान है,

हम सब पे तेरा एहसान है,

तू ही रहनुमा तू ही राहबर तेरी इक नजर मूतझर,

तू है तो हम है सतगुरु बिन तेरे हम कुछ भी नहीं,

अल्ल्हा मेरे मोला तेरे नाल मौज बहारा,

जीवन मेरे दिया शहंशाह तेरे हथ मुहारा,

अल्ल्हा मेरे मोला तेरे नाल मौज बहारा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।