है मन में यही भगवान प्यारी सी आशाये

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॥ पावन पाठ ॥

मैं तुझको नजर आऊ तू ही मुझको नजर ये,

है मन में यही भगवान प्यारी सी आशाये,

मेरे लिए मेरे दाता तू सब से मूल्यवान है,

नही चाहिए खुशिया जन्नत की खुशियों का तू झाल है,

तूझे पा कर पूरी हुई मेरी सारी इशाये,

है मन में यही भगवान प्यारी सी आशाये,

तेरी हर उचाई का प्रभु दिल ने किया एहसास है,

तू बल तू ही निश्ये मेरा तू ही तो विश्वाश है,

देती जो मुझे ताकक्त है तेरी शिक्षाए,

है मन में यही भगवान प्यारी सी आशाये

इतना कहना स्नेह है के तेरी महिमा लिखता है,

नैनो में बसे हो तुम एसे नही कोई तेरे सिवा टिकता है,

तू ज्ञान सूर्य मुझ्पर पावन किरने बरसाए ,

है मन में यही भगवान प्यारी सी आशाये,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।