नजरो में अपनी रखना

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॥ पावन पाठ ॥

नजरो में अपनी रखना तू मुझको हर पेहर,

बस इतनी सी कर देना प्रभु मुझे बस मेहर,

नजरो में अपनी रखना तू मुझको हर पेहर,

तेरे सिवा न मुझको कोई और देख पाए,

नजरो में अपनी रखना तू मुझको यु समाये,

बार बार कहती है मन की यही लेहर,

बस इतनी सी कर देना प्रभु मुझे बस मेहर,

नजरो में अपनी रखना तू मुझको हर पेहर,

नजरो की तेरी भाषा भर्ती है मुझमे आशा ,

नजरो से तुमने अपनी मुझे खूब है तराशा,

समा तेरी नजरो में मैं जाऊ वही ठेहर,

बस इतनी सी कर देना प्रभु मुझे बस मेहर,

नजरो में अपनी रखना तू मुझको हर पेहर,

नजरे तुम्हारी पल पल जीवन मेरा सवारे,

दीखते तेरी नजर में स्वर्गिक हमे नजारे,

तेरी नजर में देखि खुशियों की नई सेहर,

बस इतनी सी कर देना प्रभु मुझे बस मेहर,

नजरो में अपनी रखना तू मुझको हर पेहर,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।