माँ तेरी तस्वीर सिरहाने रखकर सोते हैं

सौरभ मधुकर
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

माँ तेरी तस्वीर सिरहाने रखकर सोते हैं,

यही सोच कर अपने दोनों नैन भिगोते हैं ।

कभी तो तस्वीर से निकलोगी, कभी तो मेरी मईया पिघलोगी ।

जाने कब आ जाए मईया, आँगन रोज बुहारे ,

मेरे इस छोटे से घर का कोना कोना सँवारे ।

विश्वास है मईया आएगी, मुझे आस है मईया आएगी ।

जिस दिन माँ नहीं आती हम जी भर कर रोते हैं ,

यही सोच कर अपने दोनों नैन भिगोते हैं ।

कभी तो तस्वीर से निकलोगी, कभी तो मेरी मईया पिघलोगी ।

अपनापन हो अँखियों में, होठों पे मुस्कान हो ,

ऐसे मिलना जैसे की माँ, जन्मों की पहचान हो ।

इकबार तू कहदे ओ मईया, मुझे लाल तू कहदे ओ मईया,

इसके खातिर अँखियाँ मसल मसल कर रोते हैं ,

यही सोच कर अपने दोनों नैन भिगोते हैं ।

कभी तो तस्वीर से निकलोगी, कभी तो मेरी मईया पिघलोगी ।

इक दिन ऐसी नींद खुले, जब माँ का दीदार हो,

बनवारी फिर हो जाए, ये अँखियाँ बेकार हो,

पूछे मेरा आँगन ओ मईया, कब होगा दर्शन ओ मईया,

बस इस दिन के खातिर हम तो दिन भर रोते हैं,

यही सोच कर अपने दोनों नैन भिगोते हैं ।

कभी तो तस्वीर से निकलोगी , कभी तो मेरी मईया पिघलोगी ।

प्रस्तुतकर्ता - टी सीरीज (Tseries)

भजन गायक - सौरभ मधुकर

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