आज मेरी आ सकती है फिर कल को तेरी बारी है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

एहम करे किस बात का कोई मौत से किस की यारी है,

आज मेरी आ सकती है फिर कल को तेरी बारी है,

एहम करे किस बात का कोई मौत से किस की यारी है,

धन दोलत का एहम क्या करना साथ नही वो जायेगी

कफन मिले बना जेब की वो भी यही रह जायेगी,

अंत समय तेरे काम न आये छुटे दुनिया सारी है,

आज मेरी आ सकती है फिर कल को तेरी बारी है,

बल भुधि का एहम का क्या करना वो भी धरी रह जाएगी

बुरा समय जब भी आएगा वो काम ना आएगी,

घेरे किस्मत सभी और से दिखती बड़ी लाचारी है,

आज मेरी आ सकती है फिर कल को तेरी बारी है,

यश अपयश बस तेरी पूजा सदा ही रखना इसका ध्यान,

जैसा मान देगा तू सब को वैसा ही होगा समान,

कर्म ही देते न्याय सभी को जो जिसका अधिकारी है,

आज मेरी आ सकती है फिर कल को तेरी बारी है,

एक काम बस इतना करना हरी से लोह लगा लेना,

हरी के नाम का दीप जला कर हरी का ध्यान लगा लेना,

तनु गाता नाम प्रभु का नाम की महिमा बाहरी है,

आज मेरी आ सकती है फिर कल को तेरी बारी है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।