कमर में लचक पड़ जागी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

हो माने ना छेड़ो जी नन्द लाल मटकिया सिर से गिर जायेगी,

राधे धीरे धीरे चाल कमर में लचकी पड़ जायेगी,

हो माने ना छेड़ो जी नन्द लाल मटकिया सिर से गिर जायेगी,

मेरी मटकियाँ बनी माटी की ना पीतल लोहे की,

देदे थोडा सा माखन राधे बात मान कान्हा की ,

छीना छीन में ओ सांवरिया दही बिखर जायेगी,

राधे धीरे धीरे चाल कमर में लचकी पड़ जायेगी,

करू शिकायत माँ यशोदा से तने घना द्म्कावे,

मैं न खाऊ कसम मोसी की कान्हा न तोहे सतावे,

जूठी कसम न खावे कान्हा तेरी मोसी मर जायेगी,

राधे धीरे धीरे चाल कमर में लचकी पड़ जायेगी,

तेरे सिर पे मटकी माखन की थोडा सा मखान खिला ओ राधा बरसाने की,

तने और कोई न दीखता क्यों राधे राधे बोले,

तेरे घर में माखन कितना क्यों आगे पीछे डोले,

ओ राधे मने थारे हो गया प्यार,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।