झलक तुम्हारे ओ प्यारे भगवन

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

पलक में भर के दिखा रहे

फिलक से हम यही गा रहे,

कराने वाला करा रहा है

करनहार हम किये जा रहे है,

झलक तुम्हारे ओ प्यारे भगवन,

पलक में भर के दिखा रहे

करन करावन हार तुम्ही हो तुम ही तो करते तुम ही कराते,

बने है हम तो निमत केवल हम अपनी ऊँगली पर लगाते,

उठा के अपने हाथो गोवर्धन हमारी रक्षा किये जा रहे,

कराने वाला करा रहा है

करनहार हम किये जा रहे है,

झलक तुम्हारे ओ प्यारे भगवन,

पलक में भर के दिखा रहे

है प्रशन प्रभु की पालना से तू ही बने हो हमारे पालक,

वाह जो है सब जग का मालिक

हम उसके बने है बालक ,

हुक्म ही हुक्म चला रहा है,

हम सचे दिल से किये जा रहे,

कराने वाला करा रहा है

करनहार हम किये जा रहे है,

झलक तुम्हारे ओ प्यारे भगवन,

पलक में भर के दिखा रहे

ये ज्ञान बूधी बल सब तुम्हारा बस ज्ञान इतना हमे है धरना,

हम भी तुम्हारे सभे तुमहरा,

एह्न्कार किस बात का करना,

तेरे हवाले कश्ती हमारी,

बड़े प्यार से लिए जा रहे,

कराने वाला करा रहा है

करनहार हम किये जा रहे है,

झलक तुम्हारे ओ प्यारे भगवन,

पलक में भर के दिखा रहे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।