हर फिकर को धुएं में उड़ाता चला गया

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॥ पावन पाठ ॥

हर फिकर को धुएं में उड़ाता चला गया,

बरबादियो का मना न फजूल था,

बरबादियो का जश्न मनाता चला गया,

हर फिकर को धुएं में उड़ाता चला गया,

जो मिल गया उसे मुकदर समज लिया,

जो खो गया मैं उसको बुलाता चला गया ,

हर फिकर को धुएं में उड़ाता चला गया,

गम और ख़ुशी में फर्क न महसूस हो रहा,

मैं खुद को मुकाप पे पाता चला गया,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।