मेरे नैना विच्च सतगुरु आन वसेया नयन खोला किवें

पारंपरिक
अन्य भजन गुरुदेव भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

मेरे नैना विच्च सतगुरु आन वसेया, नयन खोला किवें

नयन खोला किवें, खोला किवें, खोला किवें, नयन खोला किवें

नयन खोलदे ते लोकी मेनू पुछदे, हां पुछदे

कित्थे रखेया इ लाल नु लको के, हां लको के,

एह सुन के मैं पलका नु होर दबया, नयन खोला किवें

राती सुपने दे विच सतगुरु आ गए, हां आ गए

मेरी मांग विच्च सुहा रंग पा गए, हां पा गए

मैं ता हो गयी सुहागन अंग अंग रंगेया, नयन खोला किवे

मेनू सतगुर ने चुन्नी दित्ती ज्ञान दी, हां ज्ञान दी

मैं ता ला लई किनारी ओहदे नाम दी, हा नाम दी

चुन्नी ले के मेरा तन मन खूब नचेया, नयन खोला किवे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।