अज नच्चणा ऐ सारी रात गल पाके चुन्नियाँ दातिए

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तेरे दर उत्ते गिद्दा अज पाणा, तैनू नच नच मैया जी मनाना

तेरे ना दा जोगी बण जाना छड़ सारी दुनियाँ दातिए

अज नच्चणा ऐ सारी रात नच्चणा गल पाके चुन्नियाँ दातिए

१ तेरी भक्ति दा चढ़ेया ऐ रंग माँ, अज बन जाना मस्त मलंग माँ

रेहमता दा मींह बरसा दे, तेरे बच्चया दी इक एहो मंग माँ

की माँ तेनु दस्सा तेरे ओन दी ख़ुशी ऐ सानु किन्निया दातिए

अज नच्चणा...

२ अज घर साहड़े होया जगराता आई वेहड़े साहड़े शेरांवाली माता

नाले भगतां ने फुल बरसाए सोहणा मैया जी दा भवन सजाता

सारे पासे जग विच सिफ़तां तेरियां हुंदिया दातिए

अज नच्चणा...

३ असी पैरां बन्न लये घुंघरू बण भगत ध्यानु अज नच्चणा

सारी रात अज भंगड़े ने पाणे नइयो पैर धरती ते रखणा

राम गावे भेंटा तेरी रँगे वीर ने एह लिखियाँ दातिए

अज नच्चणा...

Uploaded By : जगदीश अन्ज़ान नीलोखेड़ी करनाल 9896249588

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।