कन्हैया दीन दुख के

श्री गजे सिंह जी (भिवानी)
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कन्हैया, दीन दुखियों के, सहायक, तुम कहाते हो,

दुखी हूँ, दीन हूँ मैं भी, मुझे फिर क्यों भुलाते हो,

कन्हैया, दीन दुखियों के, सहायक, तुम कहाते हो

बढ़ाई, सुन के रहमत की, तुम्हारे, ददर पे आया हूँ

रहम की, भीख दो दाता, मैं गर्दिश का, सताया हूँ

हमेशा, आप ही बिगड़ी में आखिर, काम आते हो,

कन्हैया, दीन दुखियों के, सहायक, तुम कहाते हो

इनायत, की नजर करके, बालाएं टाल दो दाता

खुशी मेरी भी, झौली में, जरा सी डाल, दो दाता

जहाँ की, नेमतें तुम तो, गरीबों, पे लुटाते हो,

कन्हैया, दीन दुखियों के, सहायक, तुम कहाते हो

मैं जग से, हार कर आया, तू हारे का सहारा है

तुम्हारे, बिन नहीं जग में, कहीं मेरा, गुजारा है

लगाकर, अपने चरणों में, तरस बेकस पे खाते हो,

कन्हैया, दीन दुखियों के, सहायक, तुम कहाते हो

बड़ी बेदर्द है, दुनियां, भरोसा क्या करूँ इस पर

जहाँ दिल, दे के मैं आया, वहीं से आ रहे पत्थर

गजेसिंह, प्यार का रिश्ता तो बस तुम, ही निभाते हो-ओ

कन्हैया, दीन दुखियों के, सहायक, तुम कहाते हो,

दुखी हूँ, दीन हूँ मैं भी, मुझे फिर क्यों भुलाते हो,

कन्हैया, दीन दुखियों के, सहायक, तुम कहाते हो

भजन गायक- विकास रघुवंशी (दिल्ली)

लेखक- श्री गजे सिंह जी (भिवानी)

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।