नी मैं जाना जोगी दे नाल

पारंपरिक
माँ गंगा भजन विविध भजन ganga
॥ पावन पाठ ॥

मक्के गया,गल्ल मुकदी नाहीं

चाहे सौ सौ जुम्मे पढ़ आइये

बुल्लेशाह को पढ़ें तो जहन में

कबीर स्वत आ जाइये

गंगा गया गल्ल मुकदी नाहीं

भावें सौ सौ गोते खाइये

गया गयां गल्ल मुकदी नाहीं

भावें सौ सौ पिंड बहाइए

बुल्ले शाह गल्ल ताहियों मुकदी

जद मैं नूं दिलों मुकाइयों

पढ़ पढ़ आलम फाज़ल होयां

कदीं अपने आप नु पढ़या नही

जा जा वड़या मन्दिर मस्जिद

कदी मन अपने विच वडया नही

एव रोज़ करे, शैतान नाल लड़

कदी नफस, अपने, नाल लड़ाइए

बुल्ले शाह अस्मान उड़दीया फड़दा हे

जेडा घर बैठा ओन्नु फडया नाही

सर ते टोपी ते नीयत खोटी

लेणा की टोपी सर धर के

तस्वीर फेरी पर दिल न फिरेया

लेना की तस्वीर हथ फड़ के

चिल्ले कीता पर रब न मिलया,

लेना की चिल्लेयाँ विच वड़ के

बुल्लेया जामुन बिन दूध नही जमदा

ते भांवे लाल होवे, कढ कढ के

नी मैं जाणा जोगी दे नाल

नी मैं जाणा जोगी दे नाल

कन्नी मुंदरा पा के

मत्थे तिलक लगा के

नी मैं जाणा ,,,,,

ए जोगी मेरे मन विच बसिया

ऐ जोगी मेरा ज़ुरा ख़स्सीयाँ

सच आखां मैं कसमए कुरान

जोगी मेरा दींनए ईमान

जोगी मेरे नाल मैं

नी मैं जोगी दे नाल नाल

नी मैं जाणा जोगी दे नाल,,,,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।