लगन निकाले नारद बाबा

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

लगन निकाले नारद बाबा,

देख गौरी के हाथ,

गौरी की शादी है,

भोले बाबा के साथ,

गौरी की शादी है,

भोले बाबा के साथ

मुश्किल से दूल्हा हुए है राजी,

बीच मे माने न गौरा के माँ जी,

मेरी बेटी कभी न देगी,

शिव के हाथ में हाथ,

गौरी की शादी है,

भोले बाबा के साथ,

गौरी की शादी है,

भोले बाबा के साथ

अपने तो औघड़ भंगिया चबाये,

पारबती को यहां भूखे सुलाए,

क्या खाएगी वहाँ पे गौरी,

पके न रोटी भात,

गौरी की शादी है

भोले बाबा के साथ,

गौरी की शादी है,

भोले बाबा के साथ

जीवन भर गौरी भाँग पिसेगी,

फुटि किस्मत पे अपनी माँ को कोसेगी,

मर जाएगी साथ में इनके,

हो जाऊंगी अनाथ,

गौरी की शादी है,

भोले बाबा के साथ,

गौरी की शादी है,

भोले बाबा के साथ

शिव ने जब सुंदर रूप बनाया,

तब जा के दूल्हा को मण्डप में लाया,

'फणि' भक्त सब नाचो गाओ,

जब जब हो शिवरात,

गौरी की शादी है,

भोले बाबा के साथ,

गौरी की शादी है,

भोले बाबा के साथ

लगन निकाले नारद बाबा,

देख गौरी के हाथ,

गौरी की शादी है,

भोले बाबा के साथ,

गौरी की शादी है,

भोले बाबा के साथ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।