आरती गुरु की - भोर भाई दिन चढ़ गया मेरे बाबा

पारंपरिक
अन्य आरती गुरुदेव भजन aarti
॥ पावन पाठ ॥

भोर भाई दिन चढ़ गया मेरे बाबा

हो रही जय जयकार मण्डप बिच,

आरती गुरु की ----- मेरे सच्चे स्वामी।।-2।।

किनके तट पर आश्रम विराजे -2-.

कौन करे श्रृंगार मंडप बिच ।।आरती।।

ओ गिरनार वाले ,,------//

संगम तट पर आश्रम विराजे ,

विप्र करें सृंगार मण्डप बिच।।आरती।।

ओ बनारस वाले,,------//

कौन जलावे दिवा द्वारे तेरे ,

कौन करे जै जै कार मण्डप बिच।।आरती।।

ओ अरैल वाले,-------//

साधू जलावें दिवा द्वारे तेरे ,

भक्त करें जै जै कार मण्डप बिच।।आरती।।

ओ त्रिवेणी वाले,,------//

कौन लगावें ध्यान समाधी,

कौन करे हो पुकार मण्डप बिच।।आरती।।

ओ प्रयाग वाले,,------//

सन्त लगावें ध्यान समाधी ,

करुणा करे हो पुकार मण्डप बिच।।आरती।।

ओ समाधि वाले,,-----//

कौन भाव से ध्वज फहराए ,ज

कौन करे रखवाली मण्डप बिच।।आरती।।

ओ सच्चे आश्रम वाले,,-----//

सत्य की जय का ध्वज फहराए

रक्षा करें हनुमान मण्डप बिच।।आरती।।

हम सबके रखवाले,,-----//

स्वर÷ परम् पूज्या संत करुणामयी गुरु माँ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।