वाहेगुरु दा जपले नाम जींद लेखे ला ले

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

सतगुरु ना जप ले नाल चंगे कर्म कमा ले

वाहेगुरु दा जपले नाम जींद लेखे ला ले,

ना हरजाई दम शुदाई दम दम विच ध्या ले,

वाहेगुरु दा जपले नाम जींद लेखे ला ले,

धन दौलत तू बड़ा कमाया थोड़ा कर्म कमा ले बन्दे,

ना चंगे तेरे कर्मा जाना छड़ दे सारे काले धंदे,

जग ठगा दा मेला यार तू दिल नु समजा ले,

वाहेगुरु दा जपले नाम जींद लेखे ला ले,

जग तो जद तू जावे गा नील हथ तेरे रेहन गे खाली

जाना छड़ सब कुछ एथे ही करदा क्यों तू नियत काली,

सतगुरु नु तू बना साथ बेड़ी पार लगा ले,

वाहेगुरु दा जपले नाम जींद लेखे ला ले,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।