प्यारी माँ ओह मेरी माँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

ये जिंगदी ख़ास है माँ तू मेरे साथ है,

और क्या चाहिए उस रब से मेरे सिर पे तेरा हाथ है ,

प्यारी माँ ओह मेरी माँ

ये चाँद तारे भी तेरी बाते करते है,

ये आसाम और जमीन तेरी रहे तक ते है,

तू जन्नत से आई मेरी माँ इस जहान प्यारी माँ

प्यारी माँ ओह मेरी माँ

तेरा हाथ पकड़ मैं चला सपनो की हर गली,

तेरे अंचल में वसी अरमानो की हर गद्दी,

तू मेरी जमीन तू ही मेरा आसमा

प्यारी माँ ओह मेरी माँ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।