मांगने को हाथ भी नहीं है, बंदा गरीब है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मेरे हाथो की लकीरो का तमाशा क्या मैं जानू

मानु मैया मैं तो तुम को ही मानु

लाया न मैं कोई नजराना

किसा अजीब है

मांगने को हाथ भी नहीं है,

बंदा गरीब है,

जिस रात की न हो सुबह वो रात मैया मेरी जिंदगी,

जिस बात का न हो कोई मतलब वो बात मैया मेरी जिंदगी,

जीना ठोकरों में हर गर्दिश की मेरा नसीब है,

मांगने को हाथ भी नहीं है,

बंदा गरीब है,

मजबूर मैं गमो से होके चूर आंबे तेरे दर पे खड़ा,

मैया तूने मुझे जो न अपनाया तो फिर याहा कौन है बड़ा,

बन भोज मैं रहुगा कैसा दुनिया अकीब है,

मांगने को हाथ भी नहीं है,

बंदा गरीब है,

तेरे दर पे सवाली बन आया जमाना मैया छोड़ छाड़ के,

जरा कर दे कर्म की निगाहें मैया थोड़ा मुख मोड़ के,

मिले मुझको भी सारी बहारे जो तेरे करीब है,

मांगने को हाथ भी नहीं है,

बंदा गरीब है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।