एह मैया तेरे कदमो की धूल बन के रहु

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

एह मैया तेरे कदमो की धूल बन के रहु

हो जाऊ तुझमे मैं शामिल के तू ही है मेरी मंजिल के सुबह शाम तुझे रहु,

एह मैया तेरे कदमो की धूल बन के रहु

किस्मत की जो रेखा है बोलो किसने देखा है,

कहते है रख ती जिसे तेरी कलम का लेखा है,

तेरे बारे में क्या कहु जगदम्बे तेरे कदमो की धूल बन के रहु,

इक तरफ है ये दुनिया एक तरफ है नाम तेरा,

स्वर्ग बिछोड़ा फीका होगा कटरा है जो धाम तेरा,

है तेरा क्या जादू लाटा वाली तेरे कदमो की धूल बन के रहु,

मिलती है पंडित से सीख देदे रेहमत की तू भीख

हु सलामत तुझसे ही वरना कौन सुनेगा मेरी चीख,

हर शेह में तू ही तू शेरावाली तेरे कदमो की धूल बन के रहु,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।