सैयां माफ़ करी

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॥ पावन पाठ ॥

ना मैं अमल कमावा ना मैं फर्ज निभावा,

पल गुण कोई न जे मैं सोचा शरमावा,

तेरी शान उचेरी ते मैं मिटिया दी ढेरी,

सुन अर्जी तू मेरी,

सैयां माफ़ करी,मेहर करा इन्साफ करी,

बस माफ़ करी

एहने दुःख ने इको दुःख नाल मर जावा मैं,

नजर करे ते डुबदी डुबदी तर जावा मैं,

की करा मैं कोई राह नजर ना आवे मैनु,

तेरे बाजो सैया कौन बचावे मैनु,

मेरे चार चुफेरे होये दुखा दे हनेरे हूँ करदे सवेरे ,

सैयां माफ़ करी,मेहर करा इन्साफ करी,

बस माफ़ करी

माफ़ करी वे सैयां बोल जे मण्डा बोला,

शान च तेरी दस किवे मैं मुख नु खोला,

कर दे दूर बलावा शिरडी वाले साइयाँ,

भूल के दुनिया सारी हूँ तेरे नाल लाइयाँ,

जींद दुःख दुःख रोइ होर अर्ज न कोई,

जेहड़ी भूल मेतो होइ सैयां माफ़ करी,मेहर करा इन्साफ करी,

बस माफ़ करी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।