मालका सुख रखी

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॥ पावन पाठ ॥

हथ जोड़ करा अरदास मैं मिंटा करा सो सो बारी,

सब ते नजर मेहरा दी रखी दुःख न किसे ते आये मालका सुख रखी,

चारो तरफ है गौर अँधेरे मुश्किल में है बचे तेरे,

इतनी शक्ति भरदो इन्हे दुःख में न गबराये,

मालका सुख रखी,

हर घर में बरसे खुशहाली जीवन में हो रोज दीवाली,

खिले रहे चेहरे फूलो से कभी न ये मुरझाये मालका सुख रखी,

किसे दातरो बार रुके न प्रगति भी रफ़्तार रुके न,

किसे दी राहवा विच रोड़ा न अटकाए मालका सुख रखी,

कदे कोई मजबूर न होवे अपने कर्म तो दूर न हॉवे,

मज़बूरी ते मेहनत दा फल हर इक नु मिल जाए मालका सुख रखी,

हर इक घर विच वरकत पावी मादा वक़्त न कदे विखावी,

हसदे वसदे रेहन सदा सब हंजू न आँख विच आये मालका सुख रखी,

दुश्मन दास जहां न हॉवे नफरत ली कोई था न हॉवे,

सब दे दिला विच प्यार दी गंगा शीत लेहर लहराये मालका सुख रखी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।