तेरा वसदा रहे दरबार डुगरी वालेया

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

तेरा वसदा रहे दरबार डुगरी वालेया

साडा सुखी रहे परिवार डुगरी वालेया

दुरो दुरो दर तेरे आउंदे ने सवाली,

आये जो भी दर तेरा जाए न वो खाली

तेरा भरिया रवे भंडार डुगरी वालेया,

साडा सुखी रहे परिवार डुगरी वालेया

दिल विच श्रद्धा लेके दर जेहड़ा आउंदा है,

मंगिया मुरदा मेरे गुरु जी तो पाउँदा है,

तेरे खुले ने भण्डार डुगरी वालेया,

साडा सुखी रहे परिवार डुगरी वालेया

सोहना सोहन रूप तेरा आँख मस्तानी है,

लम्भा लम्भा झोला मेरे गुरु दी निशानी

दे पुनीत न आके प्यार डुगरी वालेया,

साडा सुखी रहे परिवार डुगरी वालेया

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।