मैं रोज उडीका लाइयाँ ने

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॥ पावन पाठ ॥

मैं रोज उडीका लाइयाँ ने कद साई मेरे वल आवेगा,

जिद्दी राह विच अखियां बिछाइयाँ ने कद आके फेरा पावेगा

मैं रह नहीं सकदा होर तरीका पाई न,

मैं तनु नहीं बुलेया मैनु बुल जाए न,

हंजुआ ने झड़ियां लाइए ने कदो आके मुख दिख लावेगा,

गल लाके बैठे साई तेरिया यादा नु,

बिन तेरे कौन सुनेगा मेरी फर्यादा नु,

हूँ काह्नु देरिया लाइयाँ ने दस कीह्नी देर लगावे गा,

तू आवे तेरे बैठ के चरण द्वावा गा,

मैं धूल तेरे चरना दी माथे लावा गा,

मैं दास हां तेरे चरना दा कद मेरी आस पूजावेगा,

मैं रोज उडीका लाइयाँ ने कद साई मेरे वल आवेगा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।