किया मैंने तुझी पे ऐतबार

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॥ पावन पाठ ॥

किया मैंने तुझी पे ऐतबार के आगे साई तू जाने,

मेरे जख्मो को तेरा इन्तजार के आगे साई तू जाने,

काम हमारे कोई न आया तंग नसीबा ने तड़पाया,

हर रस्ते पे है दीवार के आगे साई तू जाने,

तेरी आहत तेरे इशारे तेरा जलवा तेरे नज़ारे,

मांगू हर शेह में तेरा ही दीदार के आगे साई तू जाने,

एह मेरे मालिक सब का भला कर,

सिमरु मैं तुमको दिल में वसा कर,

तेरे बंदे पे तेरा ही खुमार,

के आगे साई तू जाने,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।