आहे तन्ने के मिल ज्यागा पगली चुगली मेरी तेरी मै

पारंपरिक
अन्य भजन विविध भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

आहे तन्ने के मिल ज्यागा पगली चुगली मेरी तेरी मै

चुगली मेरी तेरी मै चुगली मेरी तेरी मै

आहे तन्ने के मिल ज्यागा पगली चुगली मेरी तेरी मै

कर के निंदा खुश होइ मन में,

जान के आग लगा वे तन में

इक दिन बीते गी तेरे संग में धोब गी मैं हीरा फेरा में,

आहे तन्ने के मिल ज्यागा पगली चुगली मेरी तेरी मै

पापी पाप कारण से फुले पिके भांग नशे में धुले,

ईतवर इक घोट में न घुले कदे न आवे घेरी रे ,

आहे तन्ने के मिल ज्यागा पगली चुगली मेरी तेरी मै

जब तक रहता पूण का पेहरा,

निजे पाप का प्यार है गेहरा,

पाके खूब देखना लेहरा,

सच्चा नयाए कचेहरी में,

आहे तन्ने के मिल ज्यागा पगली चुगली मेरी तेरी मै

कहे हरी सवर पे झट ते सीटी,

जोड़ बनावट चागी बीती,

हो गी खूब फचीती सा साधु के देरी में,

आहे तन्ने के मिल ज्यागा पगली चुगली मेरी तेरी मै

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।