पुड़िया ज्ञान की पिलादे गुरुदेव दर्द मेरी नस-नस में

संत कबीर
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॥ पावन पाठ ॥

पुड़िया ज्ञान की पिलादे गुरुदेव दर्द मेरी नस-नस में,

चार महीने आये सर्दी के सर्दी सर्दी होये,

रोये नाम की उड़ा दे गुरु देव दर्द मेरी नस-नस में,

चार महीने आये गर्मी गर्मी गरमी होये

पंखा नाम का लगवाड़े गुरु देव दर्द मेरी नस-नस में,

चार महीना आये वर्षा के वर्षा वर्षा होये,

छतरी नाम की चढ़ा दे गुरु देव दर्द मेरी नस-नस में,

कहे कबीर सुनो भी साधु सुन संतो की वाणी ,

सुई नाम की लगा दे गुरु देवी दर्द मेरी नस-नस में,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।