दिता बाबा जी ने आसरा

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॥ पावन पाठ ॥

दिता बाबा जी ने आसरा बथेरा,

मैं दुनिया तो नही मंगदा,

लाया बाबा जी ने दिल विच डेरा,

नित नेड़े होके लंग दा

दिता बाबा जी ने आसरा बथेरा,

पला विच बदलियों मथे दिया लकीरा नु,

जोगियां आप लिखे भगता दिया तकदीरा नु,

केहड़े रंग विच खेड़े जोगी मेरा,

पता नही मेनू ओहदे रंग दा,

दिता बाबा जी ने आसरा बथेरा,

हो भेना नु वीर देवे मावा नु लाल जी,

आपने ओह भगता दा रखदा ख्याल जी,

नाले पाउंदा घर भगता दे फेरा ,

हो मिलने तो नही संग दा,

दिता बाबा जी ने आसरा बथेरा,

सचे दिलो जिह्ना ओहदा नाम उचारेया,

बाबा जी ने ओहनू बाहों फड के है तारेया,

पंजा चोरा वाला टूट जांदा घेरा कोई नही नेड़े खड दा,

दिता बाबा जी ने आसरा बथेरा,

किता ऐ व्यान मैं ता अपने ही मान दा,

उने वाले पाली नु ता सारा जग जांदा,

किदा होना गेड चोरासी दा नवेडा पता मेनू सारे ढंग दा,

दिता बाबा जी ने आसरा बथेरा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।